आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 57 उम्मीदवारों के नाम वाली अपनी तीसरी सूची जारी कर दी है. इसमें कई बड़े नाम शामिल हैं जैसे अधीर रंजन चौधरी जिन्हें बहरामपुर से टिकट दिया गया है, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दामाद राधाकृष्ण जिन्हें कांग्रेस ने गुलबर्गा से उतारा है और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार की बेटी प्रणीति शिंदे जिन्हें सोलापुर से टिकट दिया गया है. इस सूची में अरुणाचल प्रदेश में दो, गुजरात में 11, कर्नाटक में 17, महाराष्ट्र में सात, राजस्थान में पांच, तेलंगाना में पांच, पश्चिम बंगाल में आठ और पुडुचेरी में एक सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा की गई है. एक नजर गुजरात के 11 उम्मीदवारों पर डालते हैं :
गुजरात में लोकसभा की कुल 26 सीटें हैं. कांग्रेस 24 सीटों पर लड़ रही है और आम आदमी पार्टी को 2 सीटें दी हैं. गुजरात में अब तक कांग्रेस ने 7 उम्मीदवार घोषित किए थे जिसमें से रोहन गुप्ता ने टिकट वापस कर दिया है.
1. गांधीनगर से सोनलबेन पटेल (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, महिला कांग्रेस)
सोनलबेन पाटीदार समाज से आती हैं. वह प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं. गांधीनगर लोकसभा कांग्रेस के लिए सबसे कमजोर सीटों में से है. यहां किसी भी उम्मीदवार के लड़ने से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.
2. छोटा उदेपुर से सुखराम राठवा (पूर्व विधायक)
इस आदिवासी मतदाता बहुल सीट पर कांग्रेस ने पूर्व विधायक और विधायक दल के पूर्व नेता रहे सुखराम राठवा को चुनावी मैदान में उतारा है. राठवा लंबे अरसे से कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता और नेता हैं.
3. साबरकांठा से डॉ तुषार चौधरी (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
डॉ तुषार चौधरी गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री अमर सिंह चौधरी के बेटे हैं. वह अभी खेडब्रह्मा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं. साबरकांठा लोकसभा सीट ओबीसी प्रभावित सीट है पर यहां आदिवासी मतदाता भी हैं. तुषार चौधरी आदिवासी समाज का एक बड़ा चेहरा हैं. वह दो बार विधायक, दो बार सांसद रहे हैं. वह यूपीए सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं. चौधरी 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव हार चुके हैं. भाजपा ने इस सीट पर नया चेहरा दिया है जिनके सामने चौधरी लड़ेंगे.
4. आणंद से अमित चावड़ा (विधायक दल के नेता)
आणंद लोकसभा पर पारंपारिक तौर पर सोलंकी-चावड़ा परिवार का दबदबा रहा है. अमित चावड़ा 5 बार से विधायक हैं. अमित चावड़ा के दादा ईश्वरसिंह चावड़ा इस लोकसभा सीट के 3 बार सांसद रह चुके हैं. उनके चचेरे भाई भरतसिंह सोलंकी 2 बार सांसद और यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हैं. अमित चावड़ा अभी कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वह भाजपा के मीतेश पटेल के खिलाफ लड़ेंगे जो पिछले चुनाव मे यहां से जीते थे और इस बार उन्हें रिपीट किया गया है.
5. पाटन से चंदनजी ठाकोर (पूर्व विधायक)
ओबीसी समुदाय प्रभावित इस सीट पर कांग्रेस ने चंदनजी ठाकोर को मैदान में उतारा है. चंदनजी ठाकोर एक बार विधायक रहे हैं और दूसरी बार चुनाव हार गए थे. इस सीट पर ठाकोर मतदाता का प्रभाव ज्यादा है इसलिए कांग्रेस ने उन्हें मैदान में उतारा है. वह भाजपा के 2 बार से सांसद भरतजी ड़ाभी के खिलाफ लड़ेंगे, वह भी ठाकोर समुदाय से आते हैं.
6. अमरेली से जेनिबेन ठुम्मर (प्रदेश अध्यक्ष, महिला कांग्रेस)
कांग्रेस ने युवा महिला चेहरा जेनिबेन को अमरेली सीट से चुनाव मैदान में उतारा है जो पाटीदार बहुल सीट है. जेनिबेन खुद पाटीदार समाज से आती हैं और पूर्व सांसद वीरजी ठुम्मर की बेटी हैं. पिछले दो चुनाव से भाजपा इस सीट पर जीत रही है. अभी भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया.
7. खेड़ा से कालूसिंह ड़ाभी
कालूसिंह ड़ाभी पूर्व विधायक रह चुके हैं और साल 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. ओबीसी मतदाता प्रभाव वाली इस सीट पर ओबीसी चेहरे के तौर पर ड़ाभी को कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतारा है जो भाजपा के केंद्रीय राज्य मंत्री देवुसिंह चौहान के सामने लड़ेंगे.
8. सूरत से नीलेश कुंभाणी
सूरत कांग्रेस के लिए सबसे कमजोर सीटों में से एक सीट मानी जाती है. यहां पर पूर्व कॉरपोरेटर निलेश कुंभाणी को चुनाव मैदान में उतारा गया है जो भाजपा के मुकेश दलाल के सामने चुनाव लड़ेंगे. कुंभाणी इससे पहले विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं और बुरी तरह हार गए थे. यह भाजपा की सबसे सेफ सीटों में से एक मानी जाती है. पाटीदार मतदाता प्रभावित सीट होने की वजह से कुंभाणी को टिकट मिला है.
9. पंचमहाल से गुलाबसिंह चौहान (विधायक)
इस लोकसभा पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने क्षत्रिय उम्मीदवारों का चयन किया है. चौहान लंबे अरसे से कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं जिनको साल 2022 में विधानसभा का चुनाव लड़ाया गया और वह जीतकर पहली बार विधायक बने. अब उनको लोकसभा के चुनावी रण में उतारने का फैसला कांग्रेस आलाकमान ने किया है. साल 2009 में बनी इस लोकसभा सीट पर भाजपा का वर्चस्व रहा है.
10. दाहोद से प्रभाबेन तावियाड (पूर्व सांसद)
आदिवासी समाज के लिए आरक्षित सीट पर कांग्रेस ने अपने पूर्व सांसद प्रभाबेन तावियाड को चुनावी मैदान में उतारा है, जो पेशे से डॉक्टर रही हैं और साल 2009 में इसी सीट से सांसद थीं. भाजपा के जसवंत सिंह भाभोर लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने अपने डॉक्टर महिला चेहरे को मैदान में उतारा है.
11. जामनगर से जे पी मारवीया
पाटीदार समुदाय से आने वाले युवा चेहरे मारवीया को कांग्रेस ने इस सीट पर चुनाव मैदान में उतारा है जो भाजपा की दो बार से सांसद पूनम बेन माडम के सामने चुनाव लड़ेंगे. पूनमबेन लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ रही हैं. इस सीट पर पाटीदार मतदाताओं के प्रभाव को देखते हुए कांग्रेस ने पाटीदार युवा को टिकट दिया है. इससे पहले कांग्रेस से पूनमबेन के पारिवारिक चाचा विक्रम माडम सांसद रह चुके हैं.